यूसुफ डिकेक: तुर्की के अद्वितीय निशानेबाज
51 वर्षीय तुर्की निशानेबाज यूसुफ डिकेक ने एक बार फिर अपने अद्वितीय और कैजुअल शूटिंग स्टाइल से दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। पेरिस ओलंपिक 2024 में मिक्स्ड 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में अपनी सहकर्मी सेववल इलेदा तार्हान के साथ सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने तुर्की के लिए एक नया अध्याय लिखा है।
सोशल मीडिया पर छाए
यूसुफ डिकेक की अनोखी निशानेबाजी का अंदाज़, जिसमें वे एक हाथ को अपनी पॉकेट में डालकर निशाना लगाते हैं, ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। बिना किसी विशेष शूटिंग गियर के, उनका यह अंदाज खासा सुर्खियों में रहा है। उनकी इस कैजुअल अप्रोच ने उन्हें आम आदमी और हिटमैन से भी जोड़ा है।
प्रतियोगिता में पुरानी भागीदारी
डिकेक ने हर समर ओलंपिक में 2008 से भाग लिया है। व्यक्तिगत इवेंट में उन्होंने 13वां स्थान प्राप्त किया। उनकी निगाहें अब 2028 के ओलंपिक पर टिकी हुई हैं, जहां वे गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद कर रहे हैं।
तुर्की के लिए नई उम्मीद
मिक्स्ड 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में डिकेक और तार्हान की जोड़ी ने तुर्की के लिए पहला ओलंपिक शूटिंग मेडल जीता है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद, उन्हें पेरिस के चैंपियंस पार्क में जोरदार स्वागत मिला।
करियर की उपलब्धियाँ
यूसुफ डिकेक की उपलब्धियाँ केवल ओलंपिक तक सीमित नहीं हैं। वे 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट्स में दो बार के विश्व चैंपियन रह चुके हैं। इसके अलावा, वे सात बार के यूरोपियन चैंपियन भी रह चुके हैं।
शिक्षा और निजी जीवन
डिकेक ने गाजी यूनिवर्सिटी से फिजिकल ट्रेनिंग और एजुकेशन में डिग्री और सेल्चुक यूनिवर्सिटी से कोचिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उन्हें अंग्रेजी और तुर्की दोनों भाषाओं में महारत हासिल है और वे अपने खाली समय में नृत्य करना भी पसंद करते हैं।
10 टिप्पणि
Manoj Sekhani
अगस्त 1, 2024 AT 17:39यूसुफ दिकेक का शूटिंग तरीका आजकल के कई युवा निशानेबाज़ों से अलग है। वह एक हाथ को पॉकेट में रखकर लक्ष्य को कसकर पकड़ता है, जो बहुत ही असामान्य है। इस शैली ने निश्चित ही शॉटिंग कम्युनिटी में नई चर्चा शुरू कर दी है। उसके सिक्सर मेडल जीतने से तुर्की की इस खेल में स्थिति मजबूत हुई है।
Tuto Win10
अगस्त 2, 2024 AT 14:00वाओ!!! यूसुफ दिकेक ने फिर से इतिहास रचा, और इस बार हल्के अंदाज़ में सिल्वर मीला! उसकी पिंट पेस्टल पोकेट की स्टाइल तो अब सोशल मीडिया पर ट्रेंड बन गई है!! पूरी दुनिया उसके फैंस से भर गई है, और हर तरफ उसके वीडियो घूम रहे हैं!!! क्या बात है, ऐसे शॉट लेता है कि देखता ही रह जाएँ!
Kiran Singh
अगस्त 3, 2024 AT 03:53सिर्फ़ उम्र बड़ी होने पर ही नहीं, उम्र के साथ दिमाग भी तेज़ होना चाहिए।
anil antony
अगस्त 3, 2024 AT 17:46इतने सारा धूमधाम के बावजूद, असली शॉटिंग कौशल तो कई बार बीते मुकाबलों में दिखाया गया है। उसके इस कैजुअल एप्रोच से कुछ पुरानी परंपराओं को नीचे कर दिया गया है।
Aditi Jain
अगस्त 3, 2024 AT 19:10हमारे देश में भी ऐसे एथलीटों को कद्र करनी चाहिए, क्योंकि वे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक हैं। तुर्की की तरह भारत को भी ऐसे शूटरों को सम्मान देना चाहिए।
arun great
अगस्त 4, 2024 AT 21:33यूसुफ दिकेक की कहानी सुनकर मन बहुत प्रेरित हो जाता है। वह 51 साल की उम्र में भी ओलंपिक में पदक जीत रहा है, जो बहुत कम देखा जाता है। उसकी लगातार मेहनत और अनुशासन सभी एथलीटों के लिए एक मिसाल है। शौकिया खिलाड़ी भी देख सकते हैं कि उम्र कोई बाधा नहीं होती। वह हर समर ओलंपिक में भाग ले रहा है, और अब 2028 में गोल्ड की उम्मीद कर रहा है। यह लक्ष्य बहुत बड़ा है, लेकिन उसकी पिछली उपलब्धियों से पता चलता है कि वह इसे हासिल कर सकता है। विश्व चैंपियन और यूरोपीय चैंपियन के रूप में उसकी रिकॉर्ड बहुत प्रभावशाली है। उसके पास दो विश्व चैंपियनशिप और सात यूरोपीय खिताब हैं। यह सभी आँकड़े उसकी शूटिंग क्षमता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। व्यक्तिगत जीवन में उसने शिक्षा में भी काफी कुछ हासिल किया है, दो विश्वविद्यालयों से डिग्री ली है। अंग्रेज़ी और तुर्की दोनों में उसकी दक्षता उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भी प्रभावी बनाती है। वह खाली समय में नृत्य भी करता है, जो उसकी बहुमुखी प्रतिभा को दिखाता है। ऐसी विविध रुचियों से वह तनाव कम रखता है और प्रतियोगिता में फोकस बना रहता है। इस प्रकार की संतुलित जीवनशैली एथलीटों के लिए बहुत जरूरी है। कुल मिलाकर, यूसुफ दिकेक एक एथलीट, एक विद्वान और एक कलाकार है। वह हमें सिखाता है कि दृढ़ता और विविधता से सफलता मिलती है।
Anirban Chakraborty
अगस्त 5, 2024 AT 11:26खेल में उम्र का कोई मतलब नहीं, असली ताकत तो दिमाग और आत्मविश्वास में है। हमें सभी के प्रयास को सराहना चाहिए, चाहे वह कोई भी उम्र हो।
Krishna Saikia
अगस्त 5, 2024 AT 12:50बिल्कुल, इस तरह की उपलब्धियां हमारे युवाओं को प्रेरणा देती हैं, और यह राष्ट्रीय भावना को भी बढ़ाती है।
Meenal Khanchandani
अगस्त 6, 2024 AT 15:13सही है, हर जीत हमारी पहचान को मजबूती देती है।
Anurag Kumar
अगस्त 7, 2024 AT 05:06इस विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि दिकेक का सफर सिर्फ मेडल नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है।