प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन पर मुस्लिम वोट बैंक के लिए 'मुजरा' करने और समुदायों को विभाजित करने का आरोप लगाया। मोदी ने कहा कि यह गठबंधन दलितों और पिछड़े वर्गों के आरक्षण को छीनने और इसे मुस्लिमों को देने की कोशिश कर रहा है।
आरक्षण का मुद्दा
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गठबंधन अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को अल्पसंख्यक संस्थानों में कोटा देने से वंचित कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह गठबंधन इन समुदायों के अधिकारों को छीनने की साजिश कर रहा है, जिससे इनका भविष्य खतरे में है।
विपक्ष पर तीखा हमला
मोदी ने विपक्ष पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह गठबंधन ‘वोट जिहाद’ पर निर्भर है। उन्होंने राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर बिना नाम लिए तंज कसते हुए कहा कि भारत को ऐसा प्रधानमंत्री चाहिए जो वैश्विक मंच पर देश की ताकत को पुरुषार्थ से प्रदर्शित कर सके।
बिहार के विकास का वादा
मोदी ने दावा किया कि उनकी अगली पांच साल की सरकार में बिहार में विकास तेजी से होगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आने वाले वर्षों में बिहार को बेहतर बिजली आपूर्ति और अधिक पक्के मकान देगी। उन्होंने कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पिछली सरकार में साधारण लोगों को मुफ्त खाद्यान्न देने का साहस नहीं था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने महंगाई के बावजूद आम लोगों को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने किसानों और गरीबों के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनसे उनकी स्थिति में सुधार हुआ है।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने गांवों में सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुधारने का काम किया है। उन्होंने कहा कि उनकी योजनाओं का सही लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जो जरूरतमंद हैं और जिन्हें वाकई में इन सुविधाओं की आवश्यकता है।
विपक्ष की राजनीति पर निशाना
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल सत्ता प्राप्ति के लिए लोगों को बांटने की राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने भी इस तरह की राजनीति की थी, जिसकी वजह से देश का विकास रुक गया था।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने वर्ग विशेष का ही नहीं, सभी वर्गों का विकास किया है। उन्होंने कहा कि उनकी योजनाओं का उद्देश्य है कि हर भारतीय को उसका हक और सम्मान मिले, चाहे वह किसी भी वर्ग या समुदाय का क्यों न हो।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में कहा कि उन्हें विश्वास है कि जनता एक बार फिर उनकी पार्टी को समर्थन देगी ताकि वे विकास के अपने अजेंडे को आगे बढ़ा सकें और बिहार को एक उज्जवल भविष्य की ओर ले जा सकें।
19 टिप्पणि
Kanhaiya Singh
मई 25, 2024 AT 21:41प्रधानमंत्री के इस बयान को सुनकर मेरे दिल में गहरा उदासी का सागर भर गया है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, राजनीति में अक्सर शब्दों का प्रयोग मात्र दिखावे के लिये किया जाता है। लेकिन इस बार के शब्दावली ने हमें एक बार फिर असहाय महसूस कराया है। यह सिर्फ एक रचना नहीं, बल्कि जनता के भरोसे को तोड़ने का सिलसिला है। हमें उम्मीद है कि वास्तविक कदमों से ही यह दर्द कम होगा।
prabin khadgi
मई 28, 2024 AT 09:06यह वक्तव्य न केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को उजागर करता है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की गहराई को भी प्रश्न में डालता है। पहले तो हम देखते हैं कि राष्ट्रीय हित को लेकर किस प्रकार के तर्क प्रस्तुत किए जा रहे हैं। फिर हम यह विश्लेषण करते हैं कि क्या यह तर्क सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के साथ संगत है। जब कोई नेता आरक्षण एवं सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों को वैधता प्रदान करने से इनकार करता है, तो वह अपने ही आधार को कमजोर कर लेता है। इस प्रकार के बयान जनता के बीच वर्गभेद को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे न केवल सामाजिक विभाजन बढ़ता है, बल्कि राष्ट्रीय एकता को भी नुकसान पहुँचता है। यह कहना उचित होगा कि ऐसे वार्तालापों में हमें तथ्यों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए। जब कोई व्यक्ति साम्प्रदायिक उकसावे को राजनीति के हथियार के रूप में प्रयोग करता है, तो यह लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर कर देता है। इस परिप्रेक्ष्य में हमें यह देखना चाहिए कि क्या यह केवल वोट बैंक की राजनीति है या वास्तविक नीति के तौर पर पेश किया जा रहा है। साथ ही, हमें यह भी देखना चाहिए कि इस प्रकार के बयान किस हद तक सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा, यह स्पष्ट है कि विकास के सभी क्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है। केवल शब्दों से नहीं, बल्कि ठोस कार्यों से ही जनता का विश्वास जीतना संभव है। अंत में, यह कहा जा सकता है कि हमें राजनीतिक संवाद में अधिक पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में सामाजिक समरसता और प्रगति सुनिश्चित हो सके।
Aman Saifi
मई 30, 2024 AT 20:33मैं इस मुद्दे को एक खुले दिल से देख रहा हूँ। राजनीतिक भाषा अक्सर भावनाओं को छेड़ती है, पर हमें तथ्यों पर टिके रहना चाहिए। सभी वर्गों के अधिकारों को एक साथ देखना ज़रूरी है, क्योंकि केवल एक ही वर्ग को आगे बढ़ाने से सामाजिक संतुलन बिगड़ता है। इस कारण मैं मानता हूँ कि विकास के लिए समावेशी नीतियों की आवश्यकता है। हमें मिलकर एक ऐसा मंच तैयार करना चाहिए जहाँ सभी का अधिकार सुरक्षित रहे।
Ashutosh Sharma
जून 2, 2024 AT 08:00ओह माय गॉड, फिर से वही पुराने ड्रामा! जैसे हर बार सरकार को ‘रिवर्स क्वोटा’ का कर्तव्य सौंपते हैं। आधा विज्ञान, आधा कल्पना, पूरी तरह से अतिशयोक्ति। बस यही कहना चाहूँगा कि ये सब व्यंग्यात्मक है, कारण वास्तविकता से बहुत दूर।
Rana Ranjit
जून 4, 2024 AT 19:26भाषा के वैज्ञानिक विश्लेषण से स्पष्ट है कि इस वक्तव्य में कई तर्कसंगत त्रुटियां हैं। यह बयान न केवल सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देता है, बल्कि लोकतांत्रिक सिद्धांतों का भी उल्लंघन करता है। इसी कारण से हमें इस प्रकार के राजनीतिक भाषण पर गहन विचार-विमर्श करना चाहिए।
Arundhati Barman Roy
जून 7, 2024 AT 06:53मैं बहुत ehsas kar rha hu ki yeh sab baaten humare liye kitni badi galatfi hain. Ye sarkar ke taraf se koi badi milav ke baat lagti hai but sachmuch mein bahut ghalat hai. Hume is par dhyaan dena chahiye.
yogesh jassal
जून 9, 2024 AT 18:20कभी कभी हमें लगता है कि राजनैतिक शब्दजाल सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन है, लेकिन वास्तव में इनका असर गहरा होता है। चलिए, इस पर सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करते हैं! हमें सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि ठोस समाधान भी चाहिए।
Raj Chumi
जून 12, 2024 AT 05:46वही वही पुराने जुगाड़!!! क्या ये बात है! जनता को दोबारा बेवकूफ़ बनाना बंद करो!!!
mohit singhal
जून 14, 2024 AT 17:13देश को आगे बढ़ाओ! 🇮🇳
pradeep sathe
जून 17, 2024 AT 04:40आपके उद्बोधन से हमें बहुत प्रेरणा मिली, ऐसे ही सकारात्मक विचारों को बांटते रहें।
ARIJIT MANDAL
जून 19, 2024 AT 16:06ये तो स्पष्ट है, कोई नई बात नहीं।
Bikkey Munda
जून 22, 2024 AT 03:33यदि हम तथ्यों को देखें तो यह स्पष्ट है कि आरक्षण की नीति को न्यायसंगत रूप से लागू किया जाना चाहिए। इससे सामाजिक समानता स्थापित होगी तथा सभी वर्गों को विकास का समान अवसर मिलेगा।
akash anand
जून 24, 2024 AT 15:00Yeh political baat bahut hi emotional hai, lekin sach me dekho to yeh sab galat hai.
BALAJI G
जून 27, 2024 AT 02:26एक व्यक्ति के रूप में मैं यह कहूँगा कि नैतिकता और न्याय के बिना कोई भी राजनीतिक पहल असफल है। इस बात का सम्मान हर नागरिक को होना चाहिए।
Manoj Sekhani
जून 29, 2024 AT 13:53अरे, ये तो बड़े लोग हैं, अपने आप को क्या समझा रहे हैं? बात तो बहुत सरल है।
Tuto Win10
जुलाई 2, 2024 AT 01:20क्या बात है!!! ये तो शानदार है!!! लेकिन सही नहीं!!!
Kiran Singh
जुलाई 4, 2024 AT 12:46ऐसे बयानों को पढ़कर लगता है कि लोग वास्तव में क्या सोचते हैं। मैं तो कहूँगा, इसे एक तरफ रखना चाहिए। फिर भी कुछ लोग इस पर अड़े रहेंगे।
anil antony
जुलाई 7, 2024 AT 00:13बहुत ही जटिल शब्दों में ढका हुए बयान, पर असली मुद्दा यह है कि जनता को किन विषयों पर चर्चा करनी चाहिए। इस बात पर स्पष्टता नहीं है।
Aditi Jain
जुलाई 9, 2024 AT 11:40देशभक्ति की भावना को समझें और वास्तविक राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दें; यह ही असली मार्ग है।