ब्रायन जॉनसन के नवीनतम एंटी-एजिंग प्रयोग से उत्पन्न बड़ा संकट: अस्थायी दृष्टि हानि
19 नवंबर 2024 19 टिप्पणि Rakesh Kundu

ब्रायन जॉनसन की प्रयोगात्मक एंटी-एजिंग यात्रा

बायोहैकिंग की दुनिया में, 47 वर्षीय करोड़पति ब्रायन जॉनसन की 'प्रोजेक्ट ब्लूप्रिंट' को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। उनका उद्देश्य उम्र के प्रभावों को उलट देना है, जिसमें 'बेबी फेस' प्राप्त करने की महत्वाकांक्षी योजना शामिल है। जॉनसन की भव्य योजना के हिस्से में उनका हालिया एंटी-एजिंग प्रयोग शामिल था, जिसे उन्होंने यह सोचकर अपनाया कि यह उनके चेहरे की वसा को बहाल कर सकते हैं और उनकी युवा रूपी दिखावटी लुक को वापस ला सकते हैं।

इस प्रक्रिया में एक दानकर्ता से चेहरे में वसा का इंजेक्शन लगाना शामिल था, जो कि उनके लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में बदल गया। जॉनसन ने इस प्रयोजन के लिए बाहरी कोशिकामृतक्स (extracellular matrix) का उपयोग किया ताकि उनका शरीर स्वाभाविक रूप से वसा का विकास करे। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह था कि उनके शरीर की प्राकृतिक वसा को सुधारने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिले। हालांकि, इसके विपरीत, इंजेक्शन के 30 मिनट के भीतर, उनके चेहरे में सूजन और गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया उत्पन्न हो गई, जिससे उनकी दृष्टि अस्थायी रूप से प्रभावित हो गई।

एक खतरे का संभावनावाला हास्य

इस हादसे के बाद, जॉनसन ने ब्लूमबर्ग के एक रिपोर्टर के साथ एक निर्धारित बैठक में भाग लिया, जिसे उन्होंने अंधेरे जौलिक रूप से मजाक के साथ संबोधित किया कि शायद वे पहचान में नहीं आएंगे। उनका चेहरा सूजन की वजह से इतना बिगड़ चुका था कि वह शायद ही पहचाने जाते। सात दिनों के बाद, उनकी चेहरे की स्थिति सामान्य हो गई और फिर से उन्होंने और उनकी टीम ने आगे का प्रयास करने की योजना बनाई। जॉनसन वार्षिक $2 मिलियन खर्च करते हैं डॉक्टरों की एक टीम के लिए जो उनके एंटी-एजिंग उपचारों में मदद करती है, जिससे उम्र को उलटने और मृत्यु को विकल्प बनाने का प्रयास किया जाता है।

निर्माण परिस्थितियों की कठोरता

जॉनसन का यह प्रयोग उनकी 'प्रोजेक्ट ब्लूप्रिंट' पहल के हिस्से के रूप में था, जिसमें उनके बेटे से रक्त संक्रमण और जीन थेरेपी इंजेक्शन जैसी असाधारण विधियों का भी समावेश है। उनका यह कठोर यात्रा दर्शाता है कि वे किस वैकल्पिक उपायों की तलाश कर रहे हैं, जिससे वे पुराना होना हटा सकें और युवावस्था प्राप्त कर सकें।

वहीं, जॉनसन की घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि इस तरह के प्रयोग कितने जोखिमपूर्ण हो सकते हैं। किसी भी प्रयोग के परिणाम हमेशा वांछित नहीं होते और कभी-कभी वे ऐसे जटिलताओं को उत्पन्न कर सकते हैं जिनकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। जब तक विज्ञान इस दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं कर लेता, तब तक इस तरह के प्रयोग व्यक्तिगत जोखिम के साथ ही करने चाहिए।

भविष्य की योजनाएं और आत्मविश्लेषण

इस आपदा के बाद, जॉनसन और उनकी शोध टीम ने जल्द ही नए प्रयोगों की योजना बनानी शुरू कर दी है। हालांकि उनकी दृष्टि वापसी हो गई है, लेकिन इस बात को उन्होंने एक सबक के रूप में लिया है। यह स्पष्ट संकेत है कि बायोहैकिंग और प्रोद्योगिकी में कोई भी गलत कदम भयावह परिणाम ला सकता है। यह घटना न केवल विज्ञान की सीमाओं को दर्शाती है, बल्कि मानव जिज्ञासा और खुद को सुधारने की आकांक्षा का भी परिचायक है।

अंततः, जॉनसन का यह अनुभव एक बड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा सकता है कि अत्यधिक प्रयोगात्मक दृष्टिकोणों को अपनाने के पहले सुरक्षा और संभावित जोखिमों का गंभीर विचार होना चाहिए। उन्होंने प्रिस्क्रिप्शन से बाहर जाकर अपने शरीर में बदलाव करने का प्रयास किया, जो कि अन्य के लिए एक उदाहरण के रूप में भी खड़ा है कि कोई भी प्रायोगिक कदम स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकता है।

Rakesh Kundu

Rakesh Kundu

मैं एक समाचार संवाददाता हूं जो दैनिक समाचार के बारे में लिखता है, विशेषकर भारतीय राजनीति, सामाजिक मुद्दे और आर्थिक विकास पर। मेरा मानना है कि सूचना की ताकत लोगों को सशक्त कर सकती है।

19 टिप्पणि

Vaidehi Sharma

Vaidehi Sharma

नवंबर 19, 2024 AT 23:50

वाह! क्या रिस्क है ये, 😱

Jenisha Patel

Jenisha Patel

नवंबर 23, 2024 AT 11:10

ब्रायन जॉनसन के इस प्रयोग को देखते हुए, यह स्पष्ट हो जाता है कि एंटी‑एजिंग के लिए अत्यधिक जोखिम उठाना अनिवार्य नहीं है; वैज्ञानिक सावधानी, नैतिक विचारधारा, तथा नियामक मानकों का पालन करना चाहिए।

Ria Dewan

Ria Dewan

नवंबर 26, 2024 AT 22:30

हाहा, अस्थायी दृष्टि हानि के साथ 'बेबी फेस' की कीमत? क्या मज़ा है, जॉनसन साहब! 🙄

rishabh agarwal

rishabh agarwal

नवंबर 30, 2024 AT 09:50

विचार करना रोचक है, लेकिन शायद वैज्ञानिक समुदाय को ऐसे प्रयोगों पर और व्यापक चर्चा करनी चाहिए।

Apurva Pandya

Apurva Pandya

दिसंबर 3, 2024 AT 21:10

ऐसे धनी लोग जब अपनी ज़िन्दगी के साथ जुआ खेलते हैं, तो समाज को उनके परिणामों का भुगतना नहीं चाहिए! 😤

Nishtha Sood

Nishtha Sood

दिसंबर 7, 2024 AT 08:30

बायोहैकिंग का असली उद्देश्य मानव स्वास्थ्य में सुधार होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत दिखावे की दौड़।
ब्रायन जॉनसन का प्रोजेक्ट ब्लूप्रिंट दिखाता है कि पैसा अक्सर सुरक्षा को पीछे धकेल देता है।
जब किसी ने चेहरा में वसा इंजेक्ट की और इससे दृष्टि हानि हुई, तो यह स्पष्ट चेतावनी है।
वैज्ञानिक प्रयोगों में कठोर नैतिक मानक और क्लिनिकल परीक्षण आवश्यक होते हैं।
समाज को इस बात पर विचार करना चाहिए कि किस हद तक व्यक्तिगत आज़ादी और सार्वजनिक स्वास्थ्य का संतुलन होना चाहिए।
भविष्य में ऐसे प्रयोगों को नियंत्रित करने के लिए नियामक संस्थाओं को सख्त नियम लागू करने चाहिए।
साथ ही, व्यक्तिगत रूप से भी हमें अपने शरीर के साथ सावधानी बरतनी चाहिए।
अक्सर लोग आकर्षक दिखावे को सम्मान देते हैं, परंतु वास्तविक जोखिमों को नजरअंदाज कर देते हैं।
जॉनसन की टीम ने शायद जल्दीबाजी में कई सुरक्षा उपायों को अनदेखा किया।
उन्हें शीघ्र ही बेहतर प्रोटोकॉल विकसित करने की जरूरत है।
यदि अन्य लोग भी ऐसे प्रयोगों को अपनाते हैं, तो संभावित आपदाएँ बढ़ेंगी।
इसलिए, वैज्ञानिक समुदाय को सार्वजनिक संवाद और शिक्षा में बेहतर निवेश करना चाहिए।
हर प्रयोग के बाद एक विस्तृत पोस्ट‑मोर्टेम रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए।
ऐसे कदम से भविष्य के शोधकर्ता समान त्रुटियों से बच सकेंगे।
अंत में, मानव शरीर को प्रयोगशाला की वस्तु न समझते हुए, सम्मान और देखभाल देना आवश्यक है।

Hiren Patel

Hiren Patel

दिसंबर 10, 2024 AT 19:50

ये तो बायोहैकिंग का नया स्तर है, बिल्कुल साय-फाई से बाहर निकला! चमक‑दमक वाली प्रक्रियाओं के पीछे छिपा डार्क साइड बहुत है।

Heena Shaikh

Heena Shaikh

दिसंबर 14, 2024 AT 07:10

आपकी आदर्शवादी बातों में कभी‑कभी वास्तविकता का अभाव रहता है; जोखिम सिर्फ़ शब्दों से कम नहीं, यह वास्तविक दर्द है।

Chandra Soni

Chandra Soni

दिसंबर 17, 2024 AT 18:30

लीड‑जेन टेक्नोलॉजी, क्रिप्टो‑बायो इंटीग्रेशन और माइक्रो‑ड्रग डिलीवरी जैसे शब्द सिर्फ़ ट्रेंड नहीं, बल्कि हमारे भविष्य के निर्माण ब्लॉक्स हैं।

Kanhaiya Singh

Kanhaiya Singh

दिसंबर 21, 2024 AT 05:50

सभी प्रयोगों में उचित क्लिनिकल ट्रायल्स का अभाव, नियामक निगरानी की कमी, और संभावित नैतिक दुविधा स्पष्ट रूप से दिखती है। 😊

prabin khadgi

prabin khadgi

दिसंबर 24, 2024 AT 17:10

प्रोजेक्ट ब्लूप्रिंट के अंतर्गत किए गए अनुसंधान में, अनुशासनात्मक प्रोटोकॉल के उल्लंघन को हम अनदेखा नहीं कर सकते; यह विज्ञान के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।

Aman Saifi

Aman Saifi

दिसंबर 28, 2024 AT 04:30

हर नवाचार में जोखिम और लाभ दोनों होते हैं; हमें संतुलन से देखना चाहिए न कि केवल नकारात्मक पक्ष पर फोकस करना।

Ashutosh Sharma

Ashutosh Sharma

दिसंबर 31, 2024 AT 15:50

अरे वाह, माइक्रो‑ड्रग डिलीवरी से सुई नहीं लगती, तो फिर क्यों चेहरे की सूजन और दृष्टि की समस्या? बहुत ही वैज्ञानिक व्याख्या है! 🙄

Rana Ranjit

Rana Ranjit

जनवरी 4, 2025 AT 03:10

भाई, इस सब में एक बात साफ़ है-आप खुद को अजेय समझ रहे हो, लेकिन बॉडी कभी भी आपका नहीं सुनती।

Arundhati Barman Roy

Arundhati Barman Roy

जनवरी 7, 2025 AT 14:30

इस तरह के एक्सपेरिमेंट से बड्डा खत्तरन हो सकता हे, सबको सोचना चाहिए।

yogesh jassal

yogesh jassal

जनवरी 11, 2025 AT 01:50

भले ही इस बार तुच्छ नतीजा आया, पर कोशिश में ही असली मज़ा है-अगली बार शायद सही हो! 😂

Raj Chumi

Raj Chumi

जनवरी 14, 2025 AT 13:10

ये तो एकदम फिल्मी सीन जैसा लग रहा है साइड इफ़ेक्ट्स के साथ

mohit singhal

mohit singhal

जनवरी 18, 2025 AT 00:30

देश के गौरव को बर्बाद करने वाले ऐसे लोभियों को सजा मिलनी चाहिए! 🚩

pradeep sathe

pradeep sathe

जनवरी 21, 2025 AT 11:50

उम्मीद है आगे के प्रयोग में सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा।

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