जब भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने चेन्नई सुपर किंग्स के लिए एक नया शतक बनाया, तो पूरा देश उसकी कमाल की तारीफ कर रहा था। लेकिन उसके घर के अंदर, एक ऐसा विवाद छिपा था जिसके बारे में किसी को अंदाजा भी नहीं था। अनिरुद्धसिंह जडेजा, रवींद्र के पिता, ने 9 फरवरी 2024 को दिव्य भास्कर के साथ एक इंटरव्यू में एक ऐसा बयान दिया जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। उन्होंने कहा — ‘मेरा रवींद्र और उसकी बहू रिवाबा के साथ कोई रिश्ता नहीं है। हम उन्हें फोन नहीं करते, वे हमें नहीं बुलाते।’ ये बातें उनके अकेलेपन के बारे में हैं — जामनगर के एक पुराने 2BHK फ्लैट में, उनकी पत्नी की ₹20,000 की पेंशन पर जीते हुए।
शादी के तीन महीने में ही टूट गया रिश्ता
रवींद्र और रिवाबा की शादी अप्रैल 2016 में राजकोट में एक शानदार तरीके से हुई थी। लेकिन अनिरुद्धसिंह के मुताबिक, शादी के तीन महीने के अंदर ही सब कुछ बदल गया। ‘उसने (रिवाबा) मुझे बताया कि सब कुछ उसके नाम पर ट्रांसफर हो जाए,’ उन्होंने कहा। ‘उसने पूरे परिवार को बिखेर दिया। उसे अकेला जीवन चाहिए था।’ उनका आरोप है कि रिवाबा ने रवींद्र के नाम के एक रेस्तरां के मालिकाना हक को अपने नाम करवाने की मांग की — जिस पर रवींद्र की बहन नायनबा ने भी सहमति दे दी थी, उम्मीद करते हुए कि यह समस्या सुलझ जाएगी। लेकिन उसके बाद, कोई समाधान नहीं आया।
ऑडी, बंगला और बिना बात किए बिक्री
कुछ खबरों में यह दावा किया गया कि रिवाबा के माता-पिता एक बड़ा व्यवसाय चलाते हैं। अनिरुद्धसिंह ने इसे खंडित किया। ‘रवींद्र ने खुद ऑडी ऑर्डर की थी, और पैसा हमारे नाम से दिया गया।’ उन्होंने बताया कि रिवाबा की माँ अभी भी नौकरी करती हैं, और उनका परिवार पहले रेलवे क्वार्टर्स में रहता था। लेकिन अब रवींद्र ने जामनगर में ₹2 करोड़ का एक चार मंजिला बंगला खरीद लिया है — जिसमें वे अकेले रहते हैं। अनिरुद्धसिंह अपने फ्लैट में अकेले रहते हैं, जबकि उनके बेटे का घर उनके बसेरे से केवल कुछ किमी दूर है। लेकिन दरवाजा बंद है।
परिवार के 50 लोगों का एक ही बयान
‘मैं गलत हो सकता हूँ, नायनबा भी गलत हो सकती है,’ अनिरुद्धसिंह ने कहा, ‘लेकिन बताओ, कैसे पूरे परिवार के 50 लोग एक साथ गलत हो सकते हैं?’ उनका दर्द यह है कि उनकी पोती, निध्याना जडेजा, जिसका जन्म 2019 में हुआ था, उनकी आँखों से पाँच साल से अज्ञात है। ‘हमने उसका चेहरा तक नहीं देखा,’ उन्होंने कहा। ‘रिवाबा के ससुराल अब सब कुछ चला रहे हैं। वे अब खुश हैं — क्योंकि उन्हें एक बैंक मिल गया है।’
रवींद्र का जवाब: ‘ये इंटरव्यू स्क्रिप्टेड है’
अनिरुद्धसिंह के इंटरव्यू के तुरंत बाद, रवींद्र जडेजा ने अपने ट्विटर अकाउंट @imjadeja पर एक छोटा सा पोस्ट डाला: ‘ये इंटरव्यू स्क्रिप्टेड और बेमानी है। मैं इन बातों को नकारता हूँ।’ उन्होंने कोई और विवरण नहीं दिया। लेकिन इस एक लाइन ने पूरी बातचीत का रुख बदल दिया। उनके लिए ये बस एक निजी मुद्दा नहीं है — ये उनकी छवि है। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने देश के लिए बहुत कुछ किया है, अब अपने परिवार के बारे में सवालों का सामना कर रहा है।
रिवाबा का राजनीतिक सफर — एक और तनाव का स्रोत
रिवाबा जडेजा ने 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा। 2022 में उन्होंने जामनगर (उत्तर) विधानसभा क्षेत्र से अपनी पहली बार चुनाव जीता। उनकी राजनीतिक सफलता ने इस मामले को और भी जटिल बना दिया। क्या ये एक सिर्फ पारिवारिक विवाद है? या इसके पीछे कोई और शक्ति का खेल है? कुछ विश्लेषकों का कहना है कि जब एक खिलाड़ी की पत्नी राजनीति में आ जाती है, तो घरेलू मुद्दे भी राजनीतिक बन जाते हैं।
अनिरुद्धसिंह का दर्द: ‘शायद क्रिकेट नहीं करता तो बेहतर होता’
अनिरुद्धसिंह ने एक ऐसा बयान दिया जिसने दिल को छू लिया। ‘शायद रवींद्र ने क्रिकेट नहीं किया होता, तो बेहतर होता।’ ये बात किसी अपने के लिए बहुत गहरी है। उन्होंने अपनी बेटी नायनबा को अपने बेटे के लिए एक माँ की भूमिका निभाते देखा। नायनबा ने उनका पालन-पोषण किया, उनकी देखभाल की। अब वो भी बेटे के साथ नहीं है। उनका पूरा जीवन एक अकेलेपन में बीत रहा है — जहाँ फोन नहीं बजता, और दरवाजा नहीं खुलता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रवींद्र जडेजा ने अपने पिता के आरोपों का जवाब क्यों नहीं दिया?
रवींद्र ने सिर्फ एक ट्वीट के जरिए आरोपों को ‘स्क्रिप्टेड और बेमानी’ बताया, लेकिन कोई विस्तृत बयान या डॉक्यूमेंटेड जवाब नहीं दिया। इसका कारण शायद यह है कि वे निजी मुद्दों को जनता के सामने लाने से बचना चाहते हैं। खिलाड़ियों के लिए परिवारिक विवाद अक्सर व्यक्तिगत रहते हैं — और उन्हें जनसामान्य के सामने लाने का खतरा होता है।
रिवाबा जडेजा की राजनीति और परिवारिक विवाद में क्या संबंध है?
रिवाबा का राजनीतिक उदय इस विवाद को और भी जटिल बना रहा है। उनकी विधानसभा विजय ने उन्हें जामनगर में एक मजबूत स्थिति दी है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि जब एक परिवार के एक सदस्य की राजनीतिक शक्ति बढ़ती है, तो दूसरे सदस्य उसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी जोखिम लेने को तैयार हो जाते हैं — जैसा कि अनिरुद्धसिंह ने किया है।
रवींद्र और रिवाबा की शादी के बाद क्या बदलाव आए?
शादी के बाद, रवींद्र की आय में तेजी से बढ़ोतरी हुई — इंटरनेशनल क्रिकेट, आईपीएल, स्पॉन्सरशिप। लेकिन अनिरुद्धसिंह के मुताबिक, इसी दौरान रिवाबा ने परिवार के साथ संबंध तोड़ने शुरू कर दिए। उन्होंने रेस्तरां, ऑडी और बंगले जैसे संपत्ति के नाम बदलने की मांग की, जिससे तनाव बढ़ा।
क्या रवींद्र के पिता के आरोपों की कोई आधिकारिक जाँच हुई?
नहीं। इन आरोपों की कोई कानूनी या सरकारी जाँच नहीं हुई है। ये सिर्फ एक पिता का व्यक्तिगत बयान है, जिसे अन्य समाचार संस्थानों ने भी रिपोर्ट किया है, लेकिन रवींद्र का जवाब एकमात्र विपरीत नजरिया है। ऐसे मामलों में आमतौर पर न्यायालय या पुलिस तब ही शामिल होती है जब कोई आर्थिक धोखाधड़ी या घरेलू हिंसा का आरोप हो।
रवींद्र जडेजा की बहन नायनबा की भूमिका क्या है?
नायनबा ने अपने भाई के बचपन से ही उनकी देखभाल की। अनिरुद्धसिंह के अनुसार, वह एक माँ की तरह उनका साथ देती रहीं। अब वह भी अपने भाई और बहू के साथ नहीं हैं। उनका उदास होना इस विवाद की गहराई को दर्शाता है — ये सिर्फ एक बेटे-पिता का विवाद नहीं, बल्कि पूरे परिवार का टूटना है।
क्या ये विवाद रवींद्र जडेजा के क्रिकेट करियर को प्रभावित करेगा?
अभी तक, रवींद्र ने अपने खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने आईपीएल और टीम इंडिया के लिए शानदार प्रदर्शन किया है। लेकिन अगर ये विवाद लंबा हुआ तो सार्वजनिक दबाव बढ़ सकता है। क्रिकेटर्स के लिए निजी जीवन की स्थिति अक्सर उनकी भावनात्मक स्थिरता पर असर डालती है — और ये खेल में असर डाल सकता है।
11 टिप्पणि
Alok Kumar Sharma
नवंबर 28, 2025 AT 07:28ये सब बकवास है। एक खिलाड़ी का परिवार उसकी कामयाबी का हिस्सा है, न कि उसका बोझ।
Ambika Dhal
नवंबर 28, 2025 AT 19:07रिवाबा ने जो किया, वो कोई बहू नहीं, एक कैलकुलेटेड बैंक रॉबर जैसा है। उसने न सिर्फ पैसा चुराया, बल्कि पूरे परिवार का दिल भी तोड़ दिया। अब राजनीति में घुसकर अपनी छवि बचाने की कोशिश कर रही है। ये सिर्फ निजी बात नहीं, ये एक सामाजिक बीमारी है।
Tanya Bhargav
नवंबर 29, 2025 AT 19:00मैं इस बात से सहमत हूँ कि रिवाबा का राजनीतिक उदय इस विवाद को और जटिल बना रहा है। लेकिन क्या हम इस बात को भूल रहे हैं कि एक पिता का दर्द कितना गहरा हो सकता है? जब आपकी पोती का चेहरा भी न देख पाएं... ये कोई आर्थिक मुद्दा नहीं, ये एक दिल का टूटना है।
Manoj Rao
दिसंबर 1, 2025 AT 00:32इस पूरी कहानी में एक गहरा नाटकीय बिंदु है - जब एक व्यक्ति सफल हो जाता है, तो उसकी असली पहचान बदल जाती है। रवींद्र के पिता ने उसे बचपन में गेंद दी, अब वो उसे एक बैंक बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। ये न केवल एक परिवार का टूटना है, बल्कि भारतीय समाज के एक अंग का विघटन है - जहाँ सफलता का मतलब अलगाव हो गया है। आपने कभी सोचा है कि क्या रवींद्र खुद भी एक बंदी है? उसकी शानदार बल्लेबाजी के पीछे, शायद एक ऐसा आत्मा छिपी है जो अपने घर के बाहर भूखी है।
क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि जब एक व्यक्ति अपने परिवार को छोड़ देता है, तो वो अपने आप को किस तरह बचाता है? क्या वो खुद को एक देश का नायक समझने की कोशिश कर रहा है? और अगर ऐसा है, तो क्या वो उस नायक के रूप में जी रहा है - या बस एक आवाज़ है जो अपने अंदर के आवाज़ को दबा रही है?
ये बातें बस एक खिलाड़ी के बारे में नहीं हैं। ये हम सबके बारे में हैं। हम सब अपने घरों के बाहर अपने असली चेहरे छिपाते हैं। और जब हम सफल होते हैं, तो हम अपने अतीत को नकार देते हैं - क्योंकि वो हमें असहज करता है।
रवींद्र ने ट्वीट किया - 'ये स्क्रिप्टेड है'। लेकिन क्या उसका ट्वीट भी कोई स्क्रिप्ट नहीं है? क्या ये एक असली जवाब है, या बस एक और बाहरी चाल? क्योंकि अगर वो असली बात बोलता, तो शायद उसे अपनी छवि खोनी पड़ती।
और फिर वो बंगला। उसके पिता के छोटे फ्लैट से केवल कुछ किमी दूर। लेकिन दरवाजा बंद। ये बात बहुत भयानक है। क्योंकि दरवाजा बंद करना आसान है - लेकिन दिल का दरवाजा बंद करना ज्यादा आसान है।
शायद रवींद्र को अपने पिता के लिए एक चिट्ठी लिखनी चाहिए। न कि एक ट्वीट। क्योंकि एक चिट्ठी में शब्द लिखे जाते हैं - और एक ट्वीट में सिर्फ एक बयान दिया जाता है।
और अगर वो चिट्ठी लिखे, तो क्या वो अपने पिता के लिए एक बार फिर एक बेटा बन पाएगा? या फिर वो अपने आप को एक नायक बनाने के लिए इतना बड़ा बन चुका है कि अब वो बेटा बनने की हिम्मत नहीं कर पा रहा?
Bhavesh Makwana
दिसंबर 1, 2025 AT 22:04हर खिलाड़ी के पीछे एक परिवार होता है, लेकिन बहुत कम लोग उस परिवार के दर्द को समझते हैं। रवींद्र ने जो किया, वो बहुत बड़ी उपलब्धि है - लेकिन उसके पिता ने जो दिया, वो कोई छोटी बात नहीं। अगर ये बात बाहर नहीं आती, तो कौन सुनेगा? ये विवाद सिर्फ एक घर का नहीं, ये पूरे देश के लिए एक दर्पण है।
Vaneet Goyal
दिसंबर 2, 2025 AT 00:37अनिरुद्धसिंह के बयान को गंभीरता से लेना चाहिए - और रवींद्र के ट्वीट को नहीं। एक पिता का दर्द बेमानी नहीं होता। ये एक आर्थिक विवाद नहीं, ये एक मानवीय अपराध है।
Vidushi Wahal
दिसंबर 2, 2025 AT 18:51मुझे लगता है कि रिवाबा को भी एक अलग नजरिया से देखना चाहिए। शायद उसे अपनी आजादी के लिए लड़ना पड़ा हो। क्या हम उसकी आवाज़ को भी सुन सकते हैं? या हम सिर्फ एक पिता के दर्द को देख रहे हैं?
Sanket Sonar
दिसंबर 3, 2025 AT 16:54ये मामला एक सामाजिक संक्रमण का उदाहरण है - जहाँ व्यक्तिगत सफलता, पारिवारिक बंधनों को तोड़ देती है। रवींद्र की आय का एक अंश उसके पिता की पेंशन को बढ़ा सकता था - लेकिन वो अपने बंगले के लिए उसे चुन रहा है। ये एक निश्चित निर्णय है। और ये निर्णय न सिर्फ एक बेटे का है, बल्कि एक समाज का भी।
Bharat Mewada
दिसंबर 4, 2025 AT 10:18क्या हम ये भूल रहे हैं कि एक बेटा अपने पिता के लिए एक आत्मा हो सकता है - और एक बहू उस आत्मा को बदल दे सकती है? रवींद्र के पिता ने उसे एक बच्चे के रूप में पाला, और अब वो उसे एक अजनबी के रूप में देख रहे हैं। ये दर्द कोई दवा नहीं ठीक कर सकता।
Amita Sinha
दिसंबर 5, 2025 AT 05:37रिवाबा ने जो किया, वो बहुत बुरा है... लेकिन क्या रवींद्र का जवाब भी इतना अच्छा है? एक ट्वीट से एक पिता का दर्द कैसे मिटेगा? 😔
pravin s
दिसंबर 6, 2025 AT 08:16मैं नहीं जानता कि कौन सही है... लेकिन ये दर्द देखकर दिल टूट गया। अगर ये बात निजी है, तो क्यों इतना बड़ा विवाद बन गया? क्या हम इसे सुलझा नहीं सकते?