बाढ़ खतरा: जब बारिश बन जाए आपदा
बाढ़ खतरा, जब नदियाँ या बारिश का पानी जमीन पर छा जाए और जीवन, घर और खेतों को बहा ले. यह कोई सामान्य मौसमी घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी आपदा है जो हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती है। भारत में बाढ़ का खतरा सिर्फ बारिश से नहीं, बल्कि जंगलों की कटाई, नहरों का अवहेलन और शहरों में बेकाबू निर्माण से भी बढ़ रहा है।
भारी बारिश अक्सर बाढ़ की शुरुआत होती है, लेकिन असली तबाही लैंडस्लाइड से होती है। जब पहाड़ी इलाकों में जमीन फिसल जाती है, तो सड़कें बंद हो जाती हैं, घर दब जाते हैं और बचाव की कोशिशें असफल हो जाती हैं। नॉर्थ बंगाल और महाराष्ट्र के घाटी इलाकों में यही दर्द बार-बार दोहराया गया है। IMD चेतावनी अब सिर्फ एक अलर्ट नहीं, बल्कि जीवन बचाने का अंतिम मौका है। ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी होने पर घर से बाहर निकलना बेकार है—अगर आप नहीं जानते कि कहाँ जाना है।
बाढ़ का खतरा सिर्फ पानी तक सीमित नहीं। यह बीमारियों का कारण बनता है, बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर देता है, और स्कूलों को बंद कर देता है। लोग जो रोज़ खेतों में काम करते हैं, उनका एक दिन का कमाई भी बह जाता है। जब बारिश बंद हो जाती है, तो दर्द नहीं बंद होता—बस वो बदल जाता है।
इस लिस्ट में आपको ऐसी खबरें मिलेंगी जहाँ बाढ़ ने जीवन बदल दिया है—कहीं 17 लोग मर गए, कहीं सरकार ने कृत्रिम बारिश की तैयारी की, कहीं लोगों ने अपने घर छोड़ दिए। ये सब कुछ एक ही सच को दर्शाता है: बाढ़ खतरा अब सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि हमारी भूलों का नतीजा है। आप जो भी खबर पढ़ेंगे, वो आपको बताएगी कि अगली बार आप क्या कर सकते हैं।
2 दिसंबर 2025
Rakesh Kundu
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चक्रवात डिटवाह के शेष भाग के कारण तमिलनाडु के चेन्नई और पड़ोसी जिलों में लाल चेतावनी जारी की। भारी बारिश और तूफानी हवाओं से तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
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