टाटा कैपिटल के ₹15,512 करोड़ आईपीओ को पहला दिन 39% सब्सक्रिप्शन, टियर‑1 दो गुना
7 अक्तूबर 2025 16 टिप्पणि Rakesh Kundu

जब टाटा कैपिटल लिमिटेड ने 6 अक्टूबर 2025 को अपना आईपीओ खोल दिया, तो बाजार की धड़कन तेज़ हो गई; पहले दिन केवल 39% सब्सक्राइब होने के बावजूद यह कुल ₹15,512 करोड़ की सबसे बड़ी ऑफरिंग बन गई, जो पिछले साल के ह्युंडे माइक्रो इंडिया के ₹27,859 करोड़ के आईपीओ के बाद सबसे बड़ा है। इस सब्सक्रिप्शन आंकड़े ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि टाटा ग्रुप की वित्तीय शाखा इस बार किस दिशा में कदम रख रही है।

पृष्ठभूमि और बाजार माहौल

टाटा समूह, जो भारत के सबसे बड़े कॉंग्लोमेरिट्स में से एक है, ने पिछले कुछ सालों में अपने वित्तीय पोर्टफोलियो को विस्तार किया है। राजीव सबहरवाल, टाटा कैपिटल के Managing Director & CEO, ने कहा कि इस आईपीओ के माध्यम से कंपनी का टियर‑1 कैपिटल रेशियो 12.8% से बढ़कर 22% से अधिक हो जाएगा और लेवरेज रेशियो 5 गुना से नीचे आएगा। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए जुटाए गए फंड को किफायती गृह वित्त, माइक्रो होम लोन, उपकरण वित्त और लीजिंग जैसी उच्च मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स में लगाया जाएगा।

यह पहल तब आती है जब घरेलू संस्थागत निवेशक लगभग ₹33,000 करोड़ प्रति सप्ताह की गति से शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं। इतने बड़े मेगा-इश्यू को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह लिक्विडिटी को काफी हद तक सोख लेगा, जिससे छोटे-कंपनी के आईपीओ पर दबाव बढ़ सकता है।

आईपीओ की विस्तृत जानकारी

इश्यू की कीमत बैंड ₹310‑₹326 के बीच तय किया गया था, और न्यूनतम लॉट साइज 46 शेयर रखा गया, जिससे निचले दायरे में न्यूनतम निवेश ₹14,996 बनता है। कुल 33,34,36,996 शेयर जारी किए गए, जबकि पहले दिन बिडेड शेयर 12,86,08,916 रहे, अर्थात 0.39 गुना सब्सक्राइब। इश्यू दो हिस्सों में बाँटा गया: ₹5,000 करोड़ का ताज़ा इक्विटी इश्यू और लगभग ₹10,512 करोड़ का ऑफ़र फॉर सेल (OFS) भाग।

सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन 8 अक्टूबर 2025 तक खुला रहेगा, और यू.पी.आई. मण्डेट अंतिम तिथि 23 अक्टूबर को तय है। पहले ही 3 अक्टूबर को, 135 एंकर निवेशकों से लगभग ₹4,641 करोड़ एकत्र हुए, जिनमें लाइफ़ इन्श्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) प्रमुख एंकर रहा। एंकर निवेशकों के लिए 50% शेयरों का लॉक‑इन 30 दिन बाद और शेष 50% का 90 दिन बाद खुलता है, यानी 8 नवंबर 2025 और 7 जनवरी 2026 को।

नज़रिए: विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रिया

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि टाटा कैपिटल का जोखिम प्रोफ़ाइल अपेक्षाकृत कम है, लेकिन मार्जिन और लाभप्रदता के आंकड़े बाकी NBFCs से थोड़ा पतले हैं। इसलिए वे सुझाव देते हैं कि निवेशकों को कंपनी के गवर्नेंस और कम जोखिम को वज़न देते हुए मूल्यांकन को देखें।

दूसरी ओर, एंकर निवेशकों में एलआईसी ने इस इश्यू को “भारतीय वित्तीय प्रणाली की स्थिरता को बढ़ावा देने वाला” कहा, और कई निजी इक्विटी फंडों ने बताया कि वे उच्च‑मार्जिन प्रोडक्ट्स में विस्तार की संभावना को देखकर उत्साहित हैं।

भविष्य के प्रभाव और संभावनाएँ

भविष्य के प्रभाव और संभावनाएँ

यदि टाटा कैपिटल का टियर‑1 कैपिटल लक्ष्य हासिल हो जाता है, तो यह कंपनी को अधिक लिवरेज वाले प्रोजेक्ट्स जैसे बिजली‑खरीद‑लीज या बड़े‑परिमाण के एसेट फाइनेंस में कदम रखने की अनुमति देगा। साथ ही, किफायती गृह वित्त में उछाल से भारत की आवासीय जरूरतों को पूरा करने में बड़ा योगदान मिल सकता है।

उल्लेखनीय बात यह है कि इस आईपीओ से मिलने वाला पूँजी प्रवाह कंपनी को अपनी डिजिटल फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म को और सुदृढ़ करने में मदद करेगा, जिससे उपभोक्ता ऋण एवं वेल्थ मैनेजमेंट सेवाओं में ग्राहक अनुभव बेहतर होगा।

आगामी कदम और निर्धारित तिथियाँ

आलोचनाओं के बाद, अलॉटमेंट 9 अक्टूबर को अंतिम रूप दिया जाएगा, फिर 10 अक्टूबर को रिफंड और शेयरों की क्रेडिट प्रक्रिया शुरू होगी। कंपनी के शेयर 13 अक्टूबर को NSE और BSE पर ट्रेडिंग शुरू करेंगे, जिससे भारतीय स्टॉक मार्केट में एक और बड़ी कंपनी का प्रवेश हो जाएगा।

इन तिथियों के साथ, बजार में नयी उम्मीदें और संभावित उतार‑चढ़ाव दोनों ही देखे जा रहे हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे कंपनी की लाभप्रदता, गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए अपवोटिंग या डाउनवोटिंग का निर्णय लें।

इतिहासिक परिप्रेक्ष्य

इतिहासिक परिप्रेक्ष्य

टाटा कैपिटल की स्थापना 2007 में टाटा सन्स लिमिटेड की सहायक कंपनी के रूप में हुई थी। तब से यह NBFC विभिन्न वित्तीय प्रोडक्ट्स—कॉमर्शियल फाइनेंस, कंज्यूमर लोन, वेल्थ मैनेजमेंट और टाटा कार्ड्स—के साथ एक व्यापक पोर्टफोलियो विकसित कर चुका है। उसके मुख्य उपकंपनी, टाटा कैपिटल हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (TCHFL), ने किफायती गृह वित्त में विशेषकर ग्रामीण और वर्ग‑बजट वर्ग के लिए कई अभिनव योजनाएं प्रदान की हैं।

पिछले दशक में टाटा समूह ने कई बार बड़े‑पैमाने के इश्यू जारी किए हैं, लेकिन इस बार की राशि और लक्ष्य, विशेषकर टियर‑1 कैपिटल को दो गुना करने का लक्ष्य, इस इश्यू को एक नई दिशा में ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाटा कैपिटल के आईपीओ में आम निवेशकों को क्या जोखिम हैं?

मुख्य जोखिम में अस्थिर ब्याज दरें, NPA (नॉन‑परफॉर्मिंग एसेट) का बढ़ना और ऋण पोर्टफोलियो में मार्जिन दबाव शामिल हैं। हालांकि, टाटा समूह की बैकिंग और मजबूत गवर्नेंस इस जोखिम को कुछ हद तक कम कर देते हैं।

एलआईसी द्वारा किए गए एंकर इन्वेस्टमेंट का क्या महत्व है?

एलआईसी का निवेश विश्वसनीयता का संकेत देता है, जिससे अन्य संस्थागत और रिटेल निवेशकों में भरोसा बढ़ता है। इससे एयर‑ड्रॉप या अलॉटमेंट प्रक्रिया में व्यवधान कम होता है।

किफायती गृह वित्त में टाटा कैपिटल की योजना क्या है?

कंपनी का लक्ष्य 2026 तक अपने गृह वित्त पोर्टफोलियो को 30% तक बढ़ाना है, जिसमें विशेषकर मध्य‑वर्ग और एएमटीओ (माइक्रो‑मार्केट) क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। इससे लाखों परिवारों को सस्ते घर का वित्त पोषण मिलेगा।

आईपीओ की सब्सक्रिप्शन आने वाले हफ्तों में कैसे बदल सकती है?

पहले दिन की 39% सब्सक्रिप्शन दर बाजार की सिचुएशन और संस्थागत लिक्विडिटी पर निर्भर है। अगर इस हफ्ते बड़े‑पैमाने के फंड्स को रिटर्न नहीं मिलता, तो बिडिंग में उछाल आ सकता है, जिससे सब्सक्रिप्शन दर 1.0‑गुना से भी अधिक हो सकती है।

टाटा कैपिटल के शेयरों की लिस्टिंग कब होगी?

शेयरों की लिस्टिंग 13 अक्टूबर 2025 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों पर निर्धारित है।

Rakesh Kundu

Rakesh Kundu

मैं एक समाचार संवाददाता हूं जो दैनिक समाचार के बारे में लिखता है, विशेषकर भारतीय राजनीति, सामाजिक मुद्दे और आर्थिक विकास पर। मेरा मानना है कि सूचना की ताकत लोगों को सशक्त कर सकती है।

16 टिप्पणि

Raja Rajan

Raja Rajan

अक्तूबर 7, 2025 AT 04:20

टाटा कैपिटल का आईपीओ 39% सब्सक्राइब्ड है, यह आंकड़ा अपेक्षित से कम है। यह दर्शाता है कि संस्थागत पूँजी अभी भी सतर्क है।

Atish Gupta

Atish Gupta

अक्तूबर 12, 2025 AT 22:13

भाई लोग, इस इश्यू का साइज देखो – ₹15,512 करोड़ की महाकुचल! लिक्विडिटी ड्रेन की बात करें तो यह एक ब्लैक होल जैसा है, जो छोटे‑कम्पनी के आईपीओ को दाँतों में पकड़ देगा। टाटा ग्रुप की टियर‑1 कैपिटल रेशियो को दो गुना करने की महाकथा अब साकार की ओर बढ़ रही है, परंतु बाजार की उत्सुकता अभी भी धुंधली है। ऐसा लगता है जैसे वित्तीय क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख रहा है, जहाँ माइक्रो‑होम लोन से लेकर एसेट फाइनेंस तक हर दिशा में दांव लग रहे हैं।

Aanchal Talwar

Aanchal Talwar

अक्तूबर 18, 2025 AT 17:06

मैं सोची रही थी कि ऐसे बड् इश्‍यु क्‍या कर सकतें है? टाटा कैपिटल के एंकर इनवेस्टमेंट मे LइC ने भरोसा झाकाया है, पर बहुत सारे रिटेल इनवेस्टर्स को तो फिर भी डरे हो सकते है। आशा करती हूं कि किफा‍ती गृह वित्त का लक्ष्य पूरे हो।

Neha Shetty

Neha Shetty

अक्तूबर 24, 2025 AT 12:00

सबसे पहले, यह समझना ज़रूरी है कि टियर‑1 कैपिटल का दो गुना होना कंपनी की वित्तीय स्थिरता को बढ़ाता है। इसके साथ ही, लिवरेज रेशियो को 5 गुना से नीचे लाना जोखिम को कम करता है, जो निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है। दूसरी ओर, किफायती गृह वित्त में विस्तार का लक्ष्य सामाजिक प्रभाव भी लाएगा-बहुत से मध्यम वर्गीय परिवारों को घर खरीदे के योग्य बना देगा। तकनीकी तौर पर, फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म को सुदृढ़ करने से ग्राहक अनुभव बेहतर होगा और संचालन लागत घटेगी। अंत में, निवेशकों को सुझाव है कि वे कंपनी के गवर्नेंस, लाभप्रदता और जोखिम प्रबंधन को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

Apu Mistry

Apu Mistry

अक्तूबर 30, 2025 AT 05:53

दुनिया में पैसा ही सब कुछ नहीं, पर फिर भी टाटा कैपिटल का यह कदम कुछ अंधकार में रोशनी जैसा है। जब टियर‑1 कैपिटल दो गुना हो जाता है, तो नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर बड़े‑परिमाण के एसेट फाइनेंस तक सबका द्वार खुल जाता है। पर क्या हम यह नहीं भूल रहे कि NPA की बढ़ोत्तरी एक छिपा हुआ दानव है? इस दानव को जीतो तो ही हम सच्चे प्रगति के पथ पर चल पाएँगे। इसलिए, इस इश्यू को केवल आंकड़ों की तरह नहीं, बल्कि एक दार्शनिक प्रश्न के रूप में देखना चाहिए-क्या हम वित्तीय शक्ति को सामाजिक कल्याण के साथ संतुलित कर सकते हैं? आध्यात्मिक रूप से यह प्रश्न हर निवेशक के दिल में उतरना चाहिए।

uday goud

uday goud

नवंबर 5, 2025 AT 00:46

देखिए, टाटा कैपिटल का यह बड़ा‑साइज़ेड आईपीओ, वास्तव में, एक वित्तीय ज्वालामुखी है; यह न केवल बाजार की धड़कन को तेज़ करता है, बल्कि निवेशकों के मन में उत्साह की लहर पैदा करता है! टियर‑1 कैपिटल रेशियो को दो‑गुना करने का लक्ष्य, जैसे किसी महाकाव्य का शिखर‑बिंदु, दर्शाता है कि कंपनी आगे बढ़ने के लिए दृढ़ संकल्पित है। लिवरेज रेशियो को पाँच गुना से नीचे ले जाना, यह एक साहसिक कदम है-जो जोखिम को कम करता है, और साथ ही उच्च‑मार्जिन प्रोडक्ट्स में विस्तार की संभावना को उजागर करता है। इस सब के बीच, एंकर निवेशकों का समर्थन, विशेषतः L.I.C. द्वारा, इस इश्यू को एक भरोसेमंद ध्वज बनाता है। अंततः, यदि इस इश्यू की सफलता यथार्थ बनती है, तो भारतीय वित्तीय परिदृश्य में एक नया युग शुरू हो सकता है।

AMRESH KUMAR

AMRESH KUMAR

नवंबर 10, 2025 AT 19:40

देश की ताकत टाटा कैपिटल में, चलो इसे समर्थन दें! 🇮🇳

ritesh kumar

ritesh kumar

नवंबर 16, 2025 AT 14:33

सभी को पता है कि बड़े फंड्स की मदद से ही ऐसा मेगा‑इश्यू निकलता है; यह कोई आकस्मिक नहीं, बल्कि एक योजना है-जिन्हें हम “डीप पॉकिट” कहते हैं। लिक्विडिटी को सोख कर छोटे‑स्टॉक को दबाने की इस रणनीति में टाटा कैपिटल केवल एक माचिस की डाली है, जिससे बड़े फंड्स के हाथ में शक्ति दोगुनी हो जाती है। यदि आप देखते हैं तो समझेंगे कि इस इश्यू में छुपा हुआ आर्थिक नियंत्रण, हमारे बाजार की स्वायत्तता को खतरे में डालता है। इसलिए फ़ोकस रखें, क्योंकि हर बड़ी घोषणा के पीछे एक गहरी साज़िश छिपी होती है।

Sunil Kumar

Sunil Kumar

नवंबर 22, 2025 AT 09:26

अगर आप इस आईपीओ को “बड़ी चीज़” कह कर नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, तो शायद आप फाइनेंस की बारीकियों से अनभिज्ञ हैं। वास्तव में, 39% सब्सक्राइब्ड दर सिर्फ एक प्रारंभीक संकेत है; संस्थागत निवेशकों का भारी भाग अभी भी बिडिंग विंडो में रहता है। फंडिंग को किफायती गृह वित्त, माइक्रो‑होम लोन और लीजिंग में लगाना, एक समझदार कदम है-क्योंकि इन सेक्टरों में मार्जिन अभी भी आकर्षक हैं। साथ ही, टाटा ग्रुप की बैकिंग जोखिम को कम करती है, जिससे NPA की संभावनाएं न्यूनतम रहती हैं। तो, इस इश्यू को एक शिक्षण अवसर मानें, न कि सिर्फ़ “बड़े नंबरों” का शोर।

Ashish Singh

Ashish Singh

नवंबर 28, 2025 AT 04:20

वित्तीय बाजारों में शक्ति का अधिरोहण, केवल आर्थिक लाभ नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी लेता है। टाटा कैपिटल द्वारा प्रस्तावित इस इश्यू में, जो कि टियर‑1 कैपिटल को दो गुना करने का लक्ष्य रखता है, यह आवश्यक है कि निवेशक नैतिक मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन करें। संस्थागत निवेशकों की भागीदारी, विशेषकर एलआईसी की एंकर भूमिका, इस प्रयोजन में विश्वसनीयता प्रदान करती है, परंतु यह भी याद रखना चाहिए कि सार्वजनिक धन का प्रयोग केवल लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। अतः, इस इश्यू को अपनाते समय, हमें इसकी दीर्घकालिक सामाजिक प्रभावों को भी परखना चाहिए, न कि केवल अल्पकालिक रिटर्न को।

ravi teja

ravi teja

दिसंबर 3, 2025 AT 23:13

देखो भाई, टाटा कैपिटल का IPO बड़ा है, पर अभी तक सब्सक्रिप्शन कम लग रहा है। शायद लोग अभी तक देख रहे हैं कि मार्केट में कितना लिक्विडिटी बचेगी। मैं तो सोच रहा हूँ कि छोटे‑बड़े दोनों investors के लिए इसमें क्या मौका है।

Harsh Kumar

Harsh Kumar

दिसंबर 9, 2025 AT 18:06

टाटा कैपिटल के इस मेगा‑इश्यू ने बाजार में नई ऊर्जा का संचार किया है। संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी, विशेषकर L.I.C. द्वारा, इस इश्यू को वैधता प्रदान करती है। साथ ही, टियर‑1 कैपिटल को दो गुना करने का लक्ष्य कंपनी की वित्तीय नियोज्यता को दर्शाता है। यह पहल किफायती गृह वित्त एवं माइक्रो‑होम लोन के विस्तार में सहायक हो सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे जोखिम‑प्रबंधन एवं गवर्नेंस को ध्यान में रखकर निर्णय लें। 🚀📈

Parul Saxena

Parul Saxena

दिसंबर 15, 2025 AT 13:00

टाटा कैपिटल का इस बार का आईपीओ भारतीय वित्तीय परिदृश्य में एक मील का पत्थर बन सकता है, क्योंकि इसकी इश्यू साइज पहले के किसी भी NBFC के मुकाबले अधिक है। जब हम इस इश्यू की सब्सक्रिप्शन दर को देखते हैं, तो 39% की प्रारम्भिक दर निस्संदेह कम प्रतीत होती है, परन्तु यह केवल पहली झलक है और वास्तविक बिडिंग प्रक्रिया में कई संस्थागत निवेशकों की भागीदारी अभी भी बनी हुई है। टियर‑1 कैपिटल को दो गुना करने का लक्ष्य, कंपनी की वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देता है और यह दर्शाता है कि टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जुटाए गए फ़ंड को किफायती गृह वित्त, माइक्रो‑होम लोन, उपकरण वित्त और लीजिंग जैसे उच्च‑मार्जिन प्रोडक्ट्स में निवेशित किया जाएगा, जो न केवल कंपनी की लाभप्रदता को बढ़ाएगा बल्कि सामाजिक असर भी उत्पन्न करेगा। यह उल्लेखनीय है कि किफायती गृह वित्त के माध्यम से मध्यम वर्गीय परिवारों को घर का स्वामित्व दिलाने की पहल, भारत की आवासीय जरूरतों को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही, डिजिटल फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म को सुदृढ़ करने की योजना से ग्राहक अनुभव में उल्लेखनीय सुधार की संभावना है, जो प्रतिस्पर्धी बाजार में कंपनी को आगे बढ़ा सकेगा। इसके अलावा, एलआईसी जैसे एंकर निवेशकों का समर्थन, इस इश्यू को बाजार में भरोसा दिलाता है और संभावित निवेशकों को आकर्षित करता है। यह विश्वास संस्थागत और रिटेल दोनों वर्गों में निवेश के प्रवाह को सुगम बनाता है, जिससे लिक्विडिटी की कमी नहीं होगी। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मेगा‑इश्यू से बाजार में लिक्विडिटी सोख ली जाएगी, जिससे छोटे‑कंपनी के आईपीओ पर दबाव बढ़ेगा। इस संदर्भ में, निवेशकों को अपने पोर्टफ़ोलियो में विविधता बनाए रखने की सलाह दी जाती है, ताकि संभावित जोखिम को कम किया जा सके। टाटा कैपिटल का यह कदम, यदि सफल होता है, तो भारत के वित्तीय बाजार में नई प्रतिस्पर्धा को जन्म देगा, और अन्य NBFCs को भी अपने कैपिटल स्ट्रक्चर को पुनः मूल्यांकित करने के लिए प्रेरित करेगा। अंत में, मेरे विचार में, इस इश्यू की सफलता न केवल कंपनी के लिए बल्कि पूरे भारतीय आर्थिक विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत होगी। इसलिए, निवेशकों को सावधानीपूर्वक विश्लेषण करके ही निर्णय लेना चाहिए, और इस अवसर को समझदारी से उपयोग करना चाहिए।

Abhishek Agrawal

Abhishek Agrawal

दिसंबर 21, 2025 AT 07:53

वाकई, टाटा कैपिटल का यह इश्यू, जैसा हम सभी जानते हैं, बाजार में अभूतपूर्व है; परंतु क्या आप जानते हैं कि इस तरह की बड़ी इश्यू अक्सर तब विफल होती है जब बाजार की अपेक्षा से अधिक लिक्विडिटी सोख ली जाती है?; इस कारण से, मेरा मानना है कि इस IPO में निवेश करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।

bhavna bhedi

bhavna bhedi

दिसंबर 27, 2025 AT 02:46

टाटा कैपिटल का बड़ा IPO देख के लगा कि अब क्या करें मैं तो सोच रही हूँ कि थोड़ा शेयर देख लेती हूँ लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव का ध्यान रखूँगी

Gurjeet Chhabra

Gurjeet Chhabra

जनवरी 1, 2026 AT 21:40

टाटा कैपिटल का IPO बड़ा है और लोग देख रहे हैं कि कब बिडिंग खुलती है

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